उपद्रवी स्थान को शुद्ध करने के लिए करें दुर्गा सप्तशती का यह सिद्ध उपाय

navratri puja

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ओम नमः शिवाय,

सज्जनों

बहुत से व्यक्तियों के कुछ इस प्रकार से प्रश्न होते हैं। कि हमारा चलता चलता काम अचानक से रुक गया है और पड़ोस की दुकान वालों का काम अच्छा चलना शुरू हो गया है, डरावने सपने आते हैं, बिना कारण से भय लगता है, कई बार घर में किसी छाया अथवा आकृति का आभास होता है, प्रतिदिन घर में कलह क्लेश होता है, रोजी-रोटी बंद हो गई है, कमाई में बरकत नहीं हो रही है, घर परिवार में कोई खुशियां नहीं है और ना ही कोई खुशी के मौके जीवन में आते हैं, अच्छी डिग्री व योग्यता होने के बावजूद जीवन में सफलता नहीं मिल रही हैं। कई सारे उपाय करने के बावजूद भी कुछ लाभ नहीं मिल रहा है आदि – आदि …….

सज्जनों कई बार कुछ ईर्ष्या व द्वेष से ग्रसित व्यक्ति किसी तांत्रिक अथवा अशुभ शक्तियों का संचालन करने वाले व्यक्तियों के पास जाकर जिससे वह ईर्ष्या – द्वेष और नफरत करते हैं। उसके काम धंधे को बंधवा देते हैं या उनके घर परिवार में तंत्र प्रयोग के द्वारा अशुभ शक्तियां भेजकर पारिवारिक सुख – समृद्धि, स्वास्थ्य आदि को खराब कर देते हैं। यदि किसी व्यक्ति के संग इसी प्रकार की गतिविधि हो रखी है और उस व्यक्ति को लगता है कि अवश्य ही मेरे यहां इस प्रकार की परेशानियां चल रही हैं तो आज हमारे द्वारा श्री दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) के 12 वें अध्याय के 19 में मंत्र की सिद्धि के बारे में बताया जाएगा। इस मंत्र के प्रयोग से मां भगवती जगदंबा की कृपा से किसी भी प्रकार की तंत्र क्रिया, बंधन क्रिया व अशुभ शक्तियों का समूल विनाश होता है। इस मंत्र का विधिवत अनुष्ठान करने से रोजी-रोटी व किसी भी प्रकार का बंधन खुलता है। ऊपरी अथवा अंदरूनी हवाओं, भूत – प्रेत, ब्लैक मैजिक व अशुभ तंत्र बाधा का समूल नाश होता है।

मंत्र – ॐ ह्रीं दुर्वत्तानामशेषाणां बलहानिकरं परम

रक्षो भूतपिशाचानां पठनादेव नाशनम् ह्रीं ॐ।।

इस मंत्र का एक दिन में 11000 जाप करके सिद्ध कर लें अथवा नवरात्रि या गुप्त नवरात्रि में प्रतिदिन जाप करके मंत्र को सिद्ध कर लें। तत्पश्चात इस मंत्र का दशांश हवन, हवन का दशांश मार्जन व मार्जन का दशांश तर्पण करें। इसके बाद 8 खेजड़ी (शमी) की लकड़ी, 8 खैर की लकड़ी, 8 लोहे की कील, 8 पीली कौड़ी, 8 हल्दी की गांठ, 8 डोडे वाली लौंग लेकर ऊपर बताए मंत्र से अभिमंत्रित करके उपद्रवी स्थान की 8 दिशाओं में गाड़ दें।

ध्यान रहे की यह पूरी प्रक्रिया मंत्र बोलते हुए अग्नि कोण से दक्षिण दिशा की तरफ से शुरू करनी है तथा एक हाथ का गड्ढा खोदकर दबानी चाहिए। कौड़ी चित्त (कट वाला हिस्सा ऊपर) करके रखनी चाहिए। इस विधिपूर्वक भगवती के मंत्र का प्रयोग करने से वह स्थान सभी प्रकार की बाधाओं से रहित होकर श्रेष्ठ फलदाई हो जाता है। भगवती की कृपा बनाए रखने के लिए प्रत्येक नवरात्रि में सप्तशती का पाठ अथवा सप्तशती के मंत्रों से अपने घर पर यज्ञ करें।

नोट  यह प्रयोग अनेक बार करके अनुभूत किया गया है।

Hawan Kaise Kare -Vidhi | संकट नाशक सामग्री से कामण-टूमण नाशक हवन

hawan kaise kare
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ओम नमः शिवाय

सज्जनों,

आज के इस वीडियो में हम जानेंगे कि

संकटनाशक सामग्री क्या है ?

संपूर्ण हवन की विधि क्या है ?

नव ग्रहों की शांति के लिए किस लकड़ी से हवन करने करना चाहिए ?

अग्नि में आहुतियां किन अंगुलियों से तथा कितनी मात्रा में डालनी चाहिए ?

संकट नाशक सामग्री (Sankat Nashak / Nashan Hawan Samagri) के द्वारा कामण-टूमण (Kaman Tuman) नाशक हवन किस प्रकार करना चाहिए ?

आसन किसका होता है और जिस आसन पर बैठकर पूजा पाठ करते हैं। उसके नीचे जल डालकर क्यों उठना चाहिए ?

इसके अलावा हवन से संबंधित और भी बहुत से भ्रमों का निवारण करने वाली बहुत सी जानकारी आपको इस वीडियो में प्राप्त होगी। आइए देखते हैं, आज के इस वीडियो को

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क्या शत्रु ने किया है – मारण, वशीकरण, उच्चाटन प्रयोग ? दुर्गा सप्तशती से करें निवारण

navratri stortam

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शास्त्रों में छह प्रकार के आभिचारिक कर्म बताए गए हैं। मतलब अशुभ कार्य जिनके द्वारा दूसरों को दुख, पीड़ा, परेशानी दी जा सकती है। यह 6 प्रकार के आभिचारिक कर्म क्रमशः मारण, मोहन, वशीकरण, स्तंभन, विद्वेषण, उच्चाटन कहलाए जाते हैं।

मारण (Maran) प्रयोग में व्यक्ति के ऊपर मारक मंत्रों के द्वारा प्रयोग किए जाते हैं। जिससे कि उस पर मृत्यु समान कष्ट आता है अथवा कई बार उसकी मृत्यु भी हो जाती है।

मोहन (Mohan) कर्म में उसको मोह लिया जाता है तथा वशीकरण (Vashikaran) प्रयोग करके उसको अपने वश में कर लिया जाता है।

स्तंभन (Stambhan) प्रयोग में कोई भी चलता हुआ कार्य, चलती हुई गाड़ी अथवा पढ़ाई में अच्छे चल रहे बालक पर यदि स्तंभन प्रयोग कर दिया जाए तो सब चीजें स्तंभित हो जाती हैं अर्थात रुक जाती हैं। कई बार किसी की कोख पर भी स्तंभन कर दिया जाता है। इसलिए उस स्त्री को बालक नहीं हो पाते और कई बार चलती हुई दुकान अथवा काम धंधा भी बिल्कुल ठप हो जाता है। इसका मुख्य कारण स्तंभन प्रयोग ही होता है।

विद्वेषण (Vidveshan) प्रयोग में जिन व्यक्तियों के बीच आपस में प्यार – प्रेम, स्नेह होता है। उनके ऊपर विद्वेषण प्रयोग कर दिया जाता है। जिस कारण से उनमें आपस में बैर, दुश्मनी, ईर्ष्या, लड़ाई झगड़े होने आरंभ हो जाते हैं।

उच्चाटन (Uchhatan) प्रयोग में जिस व्यक्ति के ऊपर उच्चाटन प्रयोग होता है। उस व्यक्ति का मन, बुद्धि, अंतरात्मा उच्चाट हो जाती है अर्थात वह पागलों की नाईं इधर-उधर भटकता है। उसका चित्त कहीं भी टिकता नहीं है। इस प्रकार से यह छह आभिचारिक कर्म है और यह प्रयोग जिस किसी व्यक्ति के ऊपर होते हैं तो ऊपर बताए गए विधान के अनुसार उस पर प्रभाव आता है।

शास्त्रों में सातवा कर्म भी बताया गया है। जिसे शांति कहा जाता है। जिस किसी व्यक्ति के ऊपर यदि उसके शत्रु ने यह 6 प्रकार के अभिचार कर्म कर दिए हैं तो वह दुर्गा जी की आराधना करके इन सभी की शांति कर सकता है।

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा | Significance of Siddha Kunjika Stotram

जीवन में सफलता की कुंजी हैसिद्ध कुंजिका नाम के अनुरूप यह सिद्ध कुंजिका है। जब किसी प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा हो, समस्या का समाधान नहीं हो रहा हो, तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करिए। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में दशों महाविद्या, नौ देवियों की आराधना है। भगवती आपकी रक्षा करेंगी।

भगवान शंकर कहते हैं कि सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ करने वाले को देवी कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास और यहां तक की अर्चन भी आवश्यक नहीं है। केवल कुंजिका के पाठ मात्र से दुर्गा पाठ का फल प्राप्त हो जाता है।

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र पाठ की विधि | Sidha Kunjika Stotram Pathh Vidhi

कुंजिका स्तोत्र का पाठ वैसे तो किसी भी माह, दिन में किया जा सकता है, लेकिन नवरात्रि में यह अधिक प्रभावी होता है। कुंजिका स्तोत्र साधना भी होती है, लेकिन यहां हम इसकी सर्वमान्य विधि का वर्णन कर रहे हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन से नवमी तक प्रतिदिन इसका पाठ किया जाता है। इसलिए साधक प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर अपने पूजा स्थान को साफ करके लाल रंग के आसन पर बैठ जाए। अपने सामने लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सामान्य पूजन करें। तेल या घी का दीपक लगाए और देवी को हलवे या मिष्ठान्न् का नैवेद्य लगाएं। 

इसके बाद अपने दाहिने हाथ में अक्षत, पुष्प, एक रुपए का सिक्का रखकर नवरात्रि के नौ दिन कुंजिका स्तोत्र का पाठ संयमनियम से करने का संकल्प लें। यह जल भूमि पर छोड़कर पाठ प्रारंभ करें। यह संकल्प केवल पहले दिन लेना है। इसके बाद प्रतिदिन उसी समय पर पाठ करें।

Precautions | सावधानी (ध्यान रखने योग्य)

देवी दुर्गा की आराधना, साधना और सिद्धि के लिए तन, मन की पवित्रता होना अत्यंत आवश्यक है। साधना काल या नवरात्रि में इंद्रिय संयम रखना जरूरी है। बुरे कर्म, बुरी वाणी का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इससे विपरीत प्रभाव हो सकते हैं।

कुंजिका स्तोत्र का पाठ बुरी कामनाओं, किसी के मारण, उच्चाटन और किसी का बुरा करने के लिए नहीं करना चाहिए। इसका उल्टा प्रभाव पाठ करने वाले पर ही हो सकता है।

साधना काल में मांस, मदिरा का सेवन करें। मैथुन के बारे में विचार भी मन में लाएं।

 

।। श्री सिद्धकुंजिकास्तोत्रम् ।।

शिव उवाच

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ।

येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत् ॥१॥

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।

न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥२॥

कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।

अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥३॥

गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।

मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।

पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥

 

।। अथ मन्त्रः ।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सःज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥

॥ इति मन्त्रः॥

 

नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।

नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥१॥

नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि।

जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ॥२॥

ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।

क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ॥३॥

चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।

विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिणि ॥४॥

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।

क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥५॥

हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।

भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥६॥

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं

धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥७॥

पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।

सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिं कुरुष्व मे ॥८॥

इदं तु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे ।

अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥

यस्तु कुंजिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत् ।

न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥

॥ इति श्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम्॥

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Maa Durga 32 Naam Mantra | Shtru Vinashak Mantra | दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला

Maa Durga 32 naam

Maa Durga 32 naam

Maa Durga Mantra for Navratri. Know What is Shatru Vinashak Mantra. Learn Happy Navratri special maa durga mantra !

Maa Durga Battis Naamavali | श्री दुर्गा बत्तीस नामवली

देवताओ को परास्त करने के बाद असुरो का अत्याचार सम्पूर्ण संसार में होने लगा । तब देवताओ की स्तुति अराधना के  पश्चात मां भगवती ने अपनी शक्तियो के साथ मिलकर सभी असुरो का नाश किया । दानव महिषासुर व दुर्गम जैसे महादानवो का वध करने वाली माता से जब देवो ने ऐसे किसी अमोघ उपाय की याचना की, जो सरल हो और कठिन से कठिन विपत्ति से छुड़ाने वाला हो। जिसका स्मरण करने मात्र से सब कष्टो से निवृति हो जाये ।

देवताओं ने कहा, ” हे देवी! यदि वह उपाय गोपनीय हो तब भी कृपा कर हमें कहें।”

तब मां भगवती ने अपने ही बत्तीस नामों की माला के एक अद्भुत गोपनीय रहस्यमय चमत्कारी जप का उपदेश दिया

मां दुर्गा जी ने कहा, ”जो मनुष्य मुझ दुर्गा की इस नाम माला का पाठ करता है, वह निःसन्देह सब प्रकार के भय से मुक्त हो जाएगा।”

‘कोई शत्रुओं से पीड़ित हो अथवा दुर्भेद्य बंधन में पड़ा हो, इन बत्तीस नामों के पाठ मात्र से संकट से छुटकारा पा जाता है। इसमें तनिक भी संदेह के लिए स्थान नहीं है। यदि राजा क्रोध में भरकर वध के लिये अथवा और किसी कठोर दण्ड के लिये आज्ञा दे दे या युद्ध में शत्रुओं द्वारा मनुष्य घिर जाय अथवा वन में व्याघ्र आदि हिंसक जंतुओं के चंगुल में फँस जाय, तो इन बत्तीस नामों का एक सौ आठ बार पाठ मात्र करने से वह संपूर्ण भयों से मुक्त हो जाता है। विपत्ति के समय इसके समान भय नाशक उपाय दूसरा नहीं है। देवगण !   इस नाम माला का पाठ करने वाले मनुष्यों की कभी कोई हानि नहीं होती। अभक्त, नास्तिक और शठ मनुष्य को इसका उपदेश नहीं देना चाहिए। जो भारी विपत्ति में पड़ने पर भी इस नामावली का हजार, दस हजार अथवा लाख बार पाठ स्वयं करता या ब्राह्मणों से कराता है, वह सब प्रकार की आपत्तियों से मुक्त हो जाता है। सिद्ध अग्नि में मधु मिश्रित सफेद तिलों से इन नामों द्वारा लाख बार हवन करे तो मनुष्य सब विपत्तियों से छूट जाता है। इस नाम माला का पुरश्चरण तीस हजार का है। पुरश्चरण पूर्वक पाठ करने से मनुष्य इसके द्वारा संपूर्ण कार्य सिद्ध कर सकता है। मेरी सुंदर मिट्टी की अष्टभुजा मूर्ति बनावे, आठों भुजाओं में क्रमशः गदा, खड्ग, त्रिशूल, बाण, धनुष, कमल, खेट (ढाल) और मुद्गर धारण करावे। मुर्ति के मस्तक में चंद्रमा का चिह्न हो, उसके तीन नेत्र हों, उसे लाल वस्त्र पहनाया गया हो, वह सिंह के कंधे पर सवार हो और शूल से महिषासुर का वध कर रही हो, इस प्रकार की प्रतिमा बनाकर नाना प्रकार की सामग्रियों से भक्ति पूर्वक मेरा पूजन करे। मेरे उत्तम नामों से लाल कनेर के फूल चढ़ाते हुए सौ बार पूजा करे और मंत्र-जाप करते हुए पूए से हवन करें। भाँति-भाँति के उत्तम पदार्थ भोग लगावे। इस प्रकार करने से मनुष्य और असाध्य कार्य को भी सिद्ध कर लेता है। जो मानव प्रतिदिन मेरा भजन करता है, वह भी विपत्ति में नहीं पड़ता।’

देवताओं से ऐसा कहकर जगदंबा वहीं अंतर्धान हो गयीं। दुर्गा जी के इस उपाख्यान को जो सुनते हैं, उन पर कोई विपत्ति नहीं आती।

 

।। अथ दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला ।।

दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी।

दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी॥

दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा।

दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला॥

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी।

दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता॥

दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी।

दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी॥

दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी।

दुर्गमाङ्गी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी॥

दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी।

नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः॥

पठेत् सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः॥

 

मां दुर्गा के 32 नाम| Maa Durga 32 Naam in Hindi

1 दुर्गा, 2 दुर्गार्तिशमनी, 3  दुर्गापद्विनिवारिणी, 4 दुर्ग मच्छेदिनी, 5 दुर्गसाधिनी, 6 दुर्गनाशिनी,  7 दुर्गतोद्धारिणी, 8 दुर्गनिहन्त्री, 9 दुर्गमापहा, 10 दुर्गमज्ञानदा, 11 दुर्गदैत्यलोकदवानला,  12 दुर्गमा, 13 दुर्गमालोका, 14 दुर्गमात्मस्वरूपिणी, 15 दुर्गमार्गप्रदा,  16 दुर्गमविद्या, 17 दुर्गमाश्रिता, 18 दुर्गमज्ञानसंस्थाना, 19 दुर्गमध्यानभासिनी, 20 दुर्गमोहा, 21 दुर्गमगा, 22 दुर्गमार्थस्वरूपिणी, 23 दुर्गमासुरसंहन्त्री, 24 दुर्गमायुधधारिणी, 25 दुर्गमाङ्गी, 26 दुर्गमता, 27 दुर्गम्या, 28 दुर्गमेश्वरी, 29 दुर्गभीमा, 30 दुर्गभामा, 31 दुर्गभा, 32 दुर्गदारिणी

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Chandra Grahan | चंद्र ग्रहण पर सिद्ध करें – बुद्धि वर्धक मंत्र

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ओम नमः शिवाय,

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इस विडियो में आप जानेंगे वो उपाय जो ग्रहण काल में बहुत कम समय में करने मात्र से दे सकता है सुबुद्धि …

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लॉटरी, रेस, शेयर, सट्टे में लाभ | Mantra for Lottery, Share Market

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ओम नमः शिवाय,
सज्जनों,
आज की भौतिकतावादी युग में हर एक व्यक्ति को भाग्य के साथ की आवश्यकता पड़ती है। व्यक्ति जितनी मेहनत करता है उससे 100 गुना अधिक लाभ की इच्छा रखता है। आज के इस वीडियो में हम मनुष्य मात्र की इस इच्छा को पूर्ण करने के निमित्त से रावण संहिता में वर्णित जुआ, लॉटरी, रेस, शेयर, सट्टे में लाभ प्राप्ति के लिए चंद्र ग्रहण पर सिद्ध करने के लिए मंत्र अनुष्ठान दे रहे हैं। जो कोई भी व्यक्ति अपने भाग्य को आजमाना चाहता है। वह इस मंत्र का प्रयोग केवल एक बार कर सकता है। यहां पर ध्यान रखने की बात यह है कि जो व्यक्ति पहले से जुआरी है। बहुत सारा धन खो चुका है। वह व्यक्ति इस मंत्र अनुष्ठान से दूर रहे। आइए जानते हैं आज के वीडियो में।

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एक अचूक उपाय मिलेगी हनुमान जी की कृपा व सिद्धि | Lord Hanuman

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ओम नमः शिवाय,

सज्जनों जेष्ठ मास आरंभ हो चुका है। इस मास में बहुत ही शुभ बड़े मंगल का योग बन रहा है। सज्जनों इस महीने में बहुत सारे योगों का समावेश और तालमेल बन रहा है। सबसे पहला योग कि यह जेष्ठ मास अधिक मास है। यानी मलमास है। मलमास में पूजा, भक्ति, निष्काम सेवा, मंत्र जाप, उपवास, धर्म ग्रंथों का पठन-पाठन बड़ा ही पुण्य फलदाई माना जाता है। दूसरा बड़ा योग है कि यह जेष्ठ मास मंगलवार से आरंभ हो रहा है। मलमास होने के कारण से जेष्ठ महीने की तिथियां बढ़ गई हैं और पूरे जेष्ठ मास के अंदर 9 मंगलवार आएंगे। अंक शास्त्र के अनुसार 9 अंक मंगल का होता है। 9 अंक पूर्णांक भी माना जाता है यानी 9 नंबर से अधिक कोई संख्या नहीं होती। तीसरा योग है मंगलवारी अमावस्या। जी हां, 15 मई 2018 को मंगलवारी अमावस्या भी पड़ रही है। चौथा बहुत बड़ा योग है कि मंगलवारी अमावस्या पर शनि जयंती यानी शनि देव जी का जन्मदिन भी आ रहा है। इस प्रकार से यह जेष्ठ मास अपने आप में बहुत शुभ फलदाई है। पुण्य फल प्रदायक है। लोगों के कष्टों का निवारण होगा। आइए जानते हैं कि इन 9 मंगलवारों में क्या उपाय करने से हनुमान जी की साधना सिद्धि व उनकी कृपा की प्राप्ति होगी। आइए जानते हैं, आज के इस वीडियो में।


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क्यों नहीं मिलती मंत्र सिद्धि ? Mantra Jap And Mantra Siddhi

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ओम नमः शिवाय, सज्जनों, आज के इस वीडियो में हम जानेंगे कि मंत्र क्या है ? मंत्र जाप करने से क्या फल मिलता है ? जाप किसे कहते हैं ? किन मंत्रों के जाप को किस प्रकार करना चाहिए ? मंत्र शक्ति कैसे काम करती है ? हमारे द्वारा ऐसी कौन सी गलतियां होती हैं जिससे मंत्र की सिद्धि नहीं हो पाती ? आज के इस वीडियो में इन सब विषयों के बारे में आपको जानकारी जा रही है।

 


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– By Pt. Sunil Vats 

किस रंग के आसन पर बैठकर कौन सा करें जाप?Mantra Jap & Aasan

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किस रंग के आसन पर बैठकर कौन सा करें मन्त्र जाप ? Mantra Jap & Aasan

ओम नमः शिवाय सज्जनों आसन अलग अलग रंग के होते हैं। किस रंग के आसन पर बैठकर किस मंत्र का जाप करना शास्त्रों में बताया गया है ? इस वीडियो में आज की इस वीडियो में हम यह सब जानेंगे। इसका क्या फल मिलता है और इसकी क्या विधि है ? इन सब विषयों के बारे में आपको जानकारी जा रही है।


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