Ashwin Shukal Sharad Navratri Calendar List 2021 | शरद नवरात्री सम्वत 2078

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नवरात्रि का अर्थ होता है, नौ रातें।यह पर्व वर्ष में दो बार आता है। एक शरद माह की नवरात्रि और दूसरी बसंत माह की इस पर्व के दौरान तीन प्रमुख हिंदू देवियों- पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कुष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री का पूजन विधि विधान से किया जाता है। जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं। प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी। तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्। पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः। नवरात्र के पीछे का वैज्ञानिक आधार यह है कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां हैं जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए तथा शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम नवरात्रहै। अमावस्या की रात से अष्टमी तक या पड़वा से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम चलने से नौ रात यानी नवरात्रनाम सार्थक है। चूंकि यहां रात गिनते हैं इसलिए इसे नवरात्र यानि नौ रातों का समूह कहा जाता है। हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है और, इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है। इन मुख्य इन्द्रियों में अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुद्धि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन, नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं।

अश्विन मास शुक्ल पक्ष (शारदीय नवरात्र) की सूची संवत 2078 सन 2021-22

तारीख नवरात्रि व्रत पूजा विधि
7 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का प्रथम दिन
8 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का द्वितीय दिन
9 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का तृतीय दिन, चतुर्थ दिन
10 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का पञ्चम दिन
11 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का षष्ठ दिन
12 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का सप्तम दिन
13 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का अष्टम दिन
14 अक्टूबर 2021 नवरात्रि का नवम दिन

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Ashwin Krishna Paksha Shradh Calendar List 2021 | श्राद्ध पक्ष

Shradh Paksh calendar

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हिंदू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है एवं उनके अधूरे शुभ कार्यों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है। श्राद्ध विधि इसी भावना पर आधारित है।

मृत्यु के बाद जीवनात्मा को उत्तम, मध्यम और कनिष्ठ कर्मानुसार स्वर्ग-नरक में स्थान मिलता है। पाप-पुण्य क्षीण होने पर वह पुन मृत्युलोक में आता है। स्वर्ग में जाना यह पितृयान मार्ग है एवं जन्म-मरण के चक्र में मुक्त होना यह देवयान मार्ग है।

पितृयान मार्ग में जाने वाले जीव पितृलोक से होकर चंद्रलोक में जाते हैं। चंद्रलोक में अमृतान्न का सेवन करके निर्वाह करते हैं। यह अमृतान्न कृष्ण पक्ष में चंद्र की कलाओं के साथ क्षीण होता रहता है। अंत कृष्ण पक्ष में उनके वंशजों को उनके लिए आहार पुहँचाना चाहिए, इसलिए श्राद्ध एवं पिंडदान की व्यवस्था की गई है। शास्त्रों में आता है कि अमावस के दिन तो पितृतर्पण अवश्य करना चाहिए।

प्रत्येक व्यक्ति के सिर पर देवऋण, पितृऋण एवं ऋषिऋण रहता है। श्राद्ध क्रिया द्वारा पितृऋण से मुक्त हुआ जाता है। देवताओं को यज्ञ-भाग देने पर देवऋण से मुक्त हुआ जाता है। ऋषि-मुनि-संतो के विचारों को, आदर्शों को अपने जीवन में उतारने से, उनका प्रचार-प्रसार करने से एवं उनके लक्ष्य मानकर आदरसहित आचरण करने से ऋषिऋण से मुक्त हुआ जाता है।

पुराणों में आता है कि अश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस के दिन सूर्य एवं चंद्र की युति होती है। सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है इस दिन हमारे पितर यमलोक से अपना निवास छोड़कर सूक्ष्म रूप से मृत्युलोक में अपने वंशजों के निवास-स्थान में रहते हैं । अंत उस दिन उनके लिए विभिन्न श्राद्ध करने से वे तृप्त होते हैं।

जो नि संतान ही चल बसे हो उन्हें मृतात्माओं के लिए भी यदि कोई व्यक्ति इन दिनों में श्राद्ध-तर्पण करेगा अथवा जलांजलि देगा तो वह भी उन तक पहुंचेगी। जिन की मरण-तिथि ज्ञात न हो उनके लिए भी अवधि के दौरान दी गई अंजलि पहुंचती है।

आश्विन कृष्ण पक्ष के श्राद्ध की सूची संवत 2078 सन 2021-22

तिथि का श्राद्ध 

तारीख

पूर्णिमा/प्रोष्पदी का श्राद्ध

20 सितंबर 2021

प्रतिपदा का श्राद्ध

21 सितंबर 2021

द्वितीया का श्राद्ध

22 सितंबर 2021

तृतीया का श्राद्ध

23 सितंबर 2021
चतुर्थी का श्राद्ध

24 सितंबर 2021

पंचमी का श्राद्ध

25 सितंबर 2021

पष्ठी का श्राद्ध

27 सितंबर 2021

सप्तमी का श्राद्ध

28 सितंबर 2021

अष्टमी का श्राद्ध

29 सितंबर 2021

नवमी का श्राद्ध

30 सितंबर 2021

दशमी का श्राद्ध

1 अक्टूबर 2021

एकादशी का श्राद्ध

2 अक्टूबर 2021

द्वादशी , सन्यासियों का श्राद्ध, मघा श्राद्ध

3 अक्टूबर 2021

त्रयोदशी का श्राद्ध

4 अक्टूबर 2021

चतुर्दशी  का श्राद्ध

5 अक्टूबर 2021

सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध, अज्ञात मृतकों का श्राद्ध, महालय श्राद्ध

6 अक्टूबर 2021

Pitru Paksha | Shradh 2021: कब से शुरु है पितृ पक्ष? जानें ​महत्वपूर्ण जानकारी

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Amavasya Calendar List 2021-22 | अमावस्या की लिस्ट

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अमावस्या का ज्योतिष शास्त्र तथा धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व है। इस दिन पितरों के निमित्त से तर्पण, पूजन, मार्जन आदि करने से पितृ दोष से मुक्ति होती है। जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष हो l  उनके लिए इस तिथि पर पितरों के निमित्त से कुछ भी किया जाए तर्पण करने से पित्र दोष शांत हो जाता है l अमावस्या तिथि को ही सूर्य पर ग्रहण लगता है l 

अमावस्या से शुरू होने वाले पक्ष को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। पुराणों में ऐसा कहा गया है कि इस दिन अपने पूर्वजों को याद कर पूजा करने और गरीबों को दान देने से मनुष्य के पापों का नाश होता है। वैसे तो सभी अमावस्या को एक समान माना जाता है, लेकिन सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या जिसे हम सोमवती अमावस्या कहते हैं। वो अन्य अमावस्या की तुलना में इस विशेष महत्व रखता है। पितरों की तर्पण के लिए भौमवती और शनिचरी अमावस्या का विशेष महत्व है l

अमावस्या की सूची संवत 2078 सन 2021-22

मास (महीना)

तारीख
चैत्र मास

12 अप्रैल 2021

वैशाख मास

11 मई 2021

ज्येष्ठ मास 

10 जून 2021

आषाढ़ मास

10 जुलाई 2021

श्रावण मास

8 अगस्त 2021

भाद्रपद मास

7 सितंबर 2021
आश्विन मास

6 अक्टूबर 2021

कार्तिक मास

4 नवंबर 2021

मार्गशीर्ष मास

4 दिसंबर 2021

पौष मास

2 जनवरी 2022

माघ मास

1 फरवरी 2022

फाल्गुन मास

2 मार्च 2022

चैत्र मास

1 अप्रैल 2022

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Masik Kalashtami Calendar List 2021-22 | मासिक कालाष्टमी लिस्ट

Masik Kalashtami Vrat Calendar

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जो कोई भी व्यक्ति कालाष्टमी की पूजा करता है l उसे भैरव बाबा का आशीर्वाद प्राप्त होता हैं प्रत्येक मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मासिक कालाष्टमी कहा जाता हैं l अतः वर्ष भर में 12 मासिक कालाष्टमी आती हैं l

मासिक कालाष्टमी की सूची संवत 2078 सन 2021-22

मास (महीना)

तारीख
चैत्र मास

4 अप्रैल 2021

वैशाख मास

3 मई 2021
ज्येष्ठ मास 

2 जून 2021

आषाढ़ मास

1 जुलाई 2021
श्रावण मास

31 जुलाई 2021

भाद्रपद मास

30 अगस्त 2021

आश्विन मास

29 सितंबर 2021

कार्तिक मास

28 अक्टूबर 2021

मार्गशीर्ष मास

27 नवंबर 2021 

पौष मास

27 दिसंबर 2021

माघ मास

25 जनवरी 2022

फाल्गुन मास

23 फरवरी 2022

चैत्र मास

25 मार्च 2022

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Siddhi Vinayak Chaturthi Vrat Calendar List 2021-22 | विनायक चतुर्थी व्रत लिस्ट

Siddhi Vinayaka Chuturthi Vrt Calendar

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प्रत्येक मास दो चतुर्थी तिथि आती है, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। गणेश पुराण में बताया गया है कि चतुर्थी तिथि गणपति भगवान को समर्पित है। कहीं-कहीं पर इसे वरद चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन बप्पा की आराधना करने से गणेश भगवान आर्थिक संपन्नता प्रदान करते हैं साथ ही ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद भी देते हैं। चतुर्थी पर बप्पा की पूजा करने से हर कार्य में सिद्धि प्राप्त होती है और गणपति भगवान अपने भक्तों के सारे दुख दूर करते हैं ।

सिद्धि विनायक चतुर्थी व्रत की सूची संवत 2078 सन 2021-22

मास (महीना) 

तारीख

चैत्र मास

16 अप्रैल 2021

वैशाख मास

15 मई 2021

ज्येष्ठ मास 

14 जून 2021

आषाढ़ मास

13 जुलाई 2021

श्रावण मास

12 अगस्त 2021

भाद्रपद मास

10 सितंबर 2021

आश्विन मास

9 अक्टूबर 2021

कार्तिक मास

8 नवंबर 2021

मार्गशीर्ष मास

7 दिसंबर 2021

पौष मास

6 जनवरी 2022

माघ मास

4 फरवरी 2022

फाल्गुन मास

6 मार्च 2022

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Masik Durga Ashtami Calendar List 2021-22 | मासिक श्री दुर्गाष्टमी व्रत लिस्ट

Masik Shree Durga Ashtami Calendar

 

प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष को आने वाली अष्टमी को दुर्गाष्टमी कहते हैं। यह तिथि मां दुर्गा को समर्पित होती है। अतः इस दिन मां दुर्गा की पूजा करने का विधान है ।प्रत्येक माह की आने वाली दुर्गा अष्टमी का व्रत बहुत शुभ फलदायी होता है। वर्ष में 12 महीने होने के कारण वर्ष भर में 12 मासिक दुर्गा अष्टमी आती हैं l

दुर्गा अष्टमी का व्रत गृहस्थियों के लिए सुख और समृद्धि देने वाला है l माता दुर्गा की आराधना करने से महामारी बाढ़ सूखा जैसे प्राकृतिक उपद्रवों से भी रक्षा होती है l

मासिक दुर्गा अष्टमी की सूची संवत 2078 सन 2021-22

मास (महीना) 

तारीख

चैत्र मास

20 अप्रैल 2021

वैशाख मास

20 मई 2021

ज्येष्ठ मास 

18 जून 2021

आषाढ़ मास

17 जुलाई 2021

श्रावण मास

15 अगस्त 2021

भाद्रपद मास

14 सितंबर 2021

आश्विन मास

13 अक्टूबर 2021

कार्तिक मास

11 नवंबर 2021

मार्गशीर्ष मास

11 दिसंबर 2021

पौष मास

10 जनवरी 2022

माघ मास

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फाल्गुन मास

10 मार्च 2022

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Pradosh Vrat Calendar List 2021-22 | प्रदोष व्रत लिस्ट

Prdos Vrt Calendar

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हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत को मुख्य रुप से भगवान शिव की कृपा पाने हेतु किया जाता है। प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत का पालन किया जाता है। प्रदोष व्रत की महिमा ऎसी है जैसे अमूल्य मोतियों में “पारस” का होना।  प्रदोष व्रत जो भी धारण करता है। उस व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और दुखों का नाश होता है।

अलग-अलग वार का त्रयोदशी तिथि के साथ संगम होने से पड़ने वाले प्रदोष व्रत की महिमा भी उसी के अनुरूप होती है ।

आईये जानें किस वार को कौन सा प्रदोष व्रत आता है और क्या है उस प्रदोष व्रत की महिमा –

सोम प्रदोष व्रत-

सोमवार जो भगवान शिव और चंद्र देव का दिन माना गया है, तो इस दिन प्रदोष व्रत का आना अत्यंत ही शुभदायक और कई गुना शुभ फलों को देने वाला होता है। यह सोने पर सुहागा की उक्ति को चरितार्थ करने वाला होता है। सोमवार को त्रयोदशी तिथि आने पर प्रदोष व्रत रखने से मानसिक सुख प्राप्त होता है, अगर चंद्रमा कुण्डली में खराब हो तो इस दिन व्रत का नियम अपनाने पर चंद्र दोष समाप्त होता है। सौभाग्य एवं परिवार के सुख की प्राप्ति होती है।

भौम प्रदोष व्रत-

मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत का आगमन संतान के सुख को देने वाला और मंगल दोष से उत्पन्न कष्टों की निवृत्ति प्रदान करने वाला होता है। इस दिन व्रत रखने पर स्वास्थ्य संबंधी कष्ट दूर होते हैं। क्रोध की शांति होती है और धैर्य साहस की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत विधि पूर्वक करने से आर्थिक घाटे से मुक्ति मिलती है। कर्ज से यदि परेशानी है तो वह भी समाप्त होती है। रक्त से संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति के लिए भौम प्रदोष व्रत अत्यंत लाभदायक होता है।

बुध प्रदोष व्रत-

बुधवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत को सौम्य प्रदोष, सौम्यवारा प्रदोष, बुध प्रदोष कहा जाता है।  इस दिन व्रत करने से बौद्धिकता में वृद्धि होती है। वाणी में शुभता आती है। जिन जातकों की कुण्डली में बुध ग्रह के कारण परेशानी है या वाणी दोष इत्यादि कोई विकार परेशान करता है तो उसके लिए बुधवार के दिन प्रदोष व्रत करने से शुभ लाभ प्राप्त होते हैं, बुध की शुभता प्राप्त होती है. छोटे बच्चों का मन अगर पढा़ई में नहीं लग रहा होता है तो माता-पिता को चाहिए की बुध प्रदोष व्रत का पालन करें इससे लाभ प्राप्त होगा।

गुरु प्रदोष व्रत-

बृहस्पतिवार/गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत होने पर गुरु के शुभ फलों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। बढ़े बुजुर्गों के आशीर्वाद स्वरुप यह व्रत जातक को संतान और सौभाग्य की प्राप्ति कराता है। व्यक्ति को ज्ञानवान बनाता है और आध्यात्मक चेतना देता है।

शुक्र प्रदोष व्रत-

शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत होने पर इसे भृगुवारा प्रदोष व्रत के नाम से भी पुकारा जाता है। इस दिन व्रत का पालन करने पर आर्थिक कठिनाईयों से मुक्ति प्राप्त होती है। व्यक्ति के जीवन में शुभता एवं सौम्यता का वास होता है। इस व्रत का पालन करने पर सौभाग्य में वृद्धि होती है और प्रेम की प्राप्ति होती है।

शनि प्रदोष व्रत-

शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने पर शनि प्रदोष व्रत होता है। शनि प्रदोष व्रत का पालन करने से शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कुंडली में मौजूद शनि दोष या शनि की साढे़साती अथवा ढैय्या से मिलने वाले कष्ट भी दूर होते हैं। शनि प्रदोष व्रत द्वारा पापों का नाश होता है। हमारे कर्मों का फल देने वाले शनिमहाराज की कृपा प्राप्त होती है। कार्यक्षेत्र और व्यवसाय में लाभ पाने के लिए भी शनि प्रदोष व्रत अत्यंत असरकारी होता है।

रवि प्रदोष व्रत-

त्रयोदशी तिथि के दिन रविवार होने पर रवि प्रदोष व्रत होता है। इस दिन को भानुवारा प्रदोष व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव की अराधना के साथ-साथ सूर्य देव की उपासना भी करनी अत्यंत शुभ फलदायी होती है। ये व्रत करने से आपको जीवन में यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है। राज्य एवं सरकार से लाभ भी मिलता है। यदि किसी कारण से सरकार की ओर से कष्ट हो रहा हो या पिता से अलगाव अथवा सुख की कमी हो तो, इस रवि प्रदोष व्रत को करने से सुखद फलों की प्राप्ति होती है। कुण्डली में अगर किसी भी प्रकार का सूर्य संबंधी दोष होने पर इस व्रत को करना अत्यंत लाभदायी होता है।

 

प्रदोष व्रत की सूची संवत 2078 सन 2021-22

मास और पक्ष

प्रदोष व्रत

तारीख

चैत्र मास कृष्ण पक्ष

शुक्र प्रदोष व्रत 9 अप्रैल 2021

चैत्र मास शुक्ल पक्ष

शनि प्रदोष व्रत 24 अप्रैल 2021

वैशाख मास कृष्ण पक्ष

शनि प्रदोष व्रत 

8 मई 2021

वैशाख मास शुक्ल पक्ष

सोम प्रदोष व्रत

24 मई 2021

ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष

सोम प्रदोष व्रत

7 जून 2021

ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष

मंगल प्रदोष व्रत

22 जून 2021

आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष

बुध प्रदोष व्रत 

7 जुलाई 2021

आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष

बुध प्रदोष व्रत 

21 जुलाई 2021

श्रावण मास कृष्ण पक्ष

गुरु प्रदोष व्रत 

5 अगस्त 2021 

श्रावण मास शुक्ल पक्ष

शुक्र प्रदोष व्रत20 अगस्त 2021

भाद्रपद मास कृष्ण  पक्ष

शनि प्रदोष व्रत

4 सितंबर 2021

भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष

शनि प्रदोष व्रत 

18 सितंबर 2021

आश्विन मास कृष्ण पक्ष

सोम प्रदोष व्रत 

4 अक्टूबर 2021

आश्विन मास शुक्ल पक्ष

सोम प्रदोष व्रत 

18 अक्टूबर 2021

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष

मंगल प्रदोष व्रत 

2 नवंबर 2021

कार्तिक मास शुक्ल पक्ष

मंगल प्रदोष व्रत 

16 नवंबर 2021

मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष

गुरु प्रदोष व्रत 

2 दिसंबर 2021

मार्गशीर्ष मास शुक्ल  पक्ष

गुरु प्रदोष व्रत 

16 दिसंबर 2021

पौष मास कृष्ण पक्ष

शुक्र प्रदोष व्रत

31 दिसंबर 2021

पौष मास शुक्ल पक्ष

शनि प्रदोष व्रत 

15 जनवरी 2022

माघ मास कृष्ण पक्ष

रवि प्रदोष व्रत

30 जनवरी 2022

माघ मास शुक्ल पक्ष

सोम प्रदोष व्रत

14 फरवरी 2022

फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष

सोम प्रदोष व्रत

28 फरवरी 2022

फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष

मंगल प्रदोष व्रत

15 मार्च 2022

चैत्र मास कृष्ण पक्ष

मंगल प्रदोष व्रत

29 मार्च 2022

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Shri Ganesh Chaturthi Vrat Calendar List 2021-22 | श्री गणेश चतुर्थी व्रत लिस्ट

Shri Ganesh Chaturthi Vrat Clendar

प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष को आने वाली अष्टमी को दुर्गाष्टमी कहते हैं। यह तिथि मां दुर्गा को समर्पित होती है। अतः इस दिन मां दुर्गा की पूजा करने का विधान है ।प्रत्येक माह की आने वाली दुर्गा अष्टमी का व्रत बहुत शुभ फलदायी होता है। वर्ष में 12 महीने होने के कारण वर्ष भर में 12 मासिक दुर्गा अष्टमी आती हैं l

दुर्गा अष्टमी का व्रत गृहस्थियों के लिए सुख और समृद्धि देने वाला है l माता दुर्गा की आराधना करने से महामारी बाढ़ सूखा जैसे प्राकृतिक उपद्रवों से भी रक्षा होती है l

श्री गणेश चतुर्थी व्रत की सूची संवत 2078 सन 2021-22

मास (महीना) तारीख
चैत्र मास31 मार्च 2021
वैशाख मास30 अप्रैल 2021
ज्येष्ठ मास 29 मई 2021
आषाढ़ मास27 जून 2021
श्रावण मास27 जुलाई 2021
भाद्रपद मास25 अगस्त 2021
आश्विन मास24 सितंबर 2021
कार्तिक मास24 अक्टूबर 2021
मार्गशीर्ष मास23 नवंबर 2021
पौष मास22 दिसंबर 2021
माघ मास21 जनवरी 2022
फाल्गुन मास     20 फरवरी 2022
चैत्र मास21 मार्च 2022

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Masik Shivratri Calendar List 2021-22 | मासिक शिवरात्रि व्रत लिस्ट

Masik Shivratri Calendar

Masik Shivratri Calendar

शिवरात्रि शिव और शक्ति के संगम का एक पर्व है l मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है। प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो महाशिवरात्रि का व्रत बहुत पुण्य शाली होता है।फिर भी भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए प्रत्येक माह की आने वाली मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से जातकों के जीवन में आने वाले कष्टों का निवारण होता है।

मासिक शिवरात्रि में व्रत, उपवास रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने से सभी मनोमनाएं पूरी होती हैं। इस दिन व्रत करने से हर मुश्किल कार्य आसान हो जाता है और जातक की सारी समस्याएं दूर होती हैं। मासिक शिवरात्रि के दिन की महिमा के बारे में यह भी कहा जाता है, कि वो कन्याएं जो मनोवांछित वर पाना चाहती हैं इस व्रत को करने के बाद उन्हें उनकी इच्छा अनुसार वर मिलता है और उनके विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भी सच्चे मन से इस व्रत को करता है उसकी सारी इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं।

मासिक शिवरात्रि की सूची संवत 2078 सन 2021-22

      मास (महीना)

तारीख

चैत्र मास

10 अप्रैल 2021

वैशाख मास

9 मई 2021

ज्येष्ठ मास 

8 जून 2021

आषाढ़ मास

8 जुलाई 2021

श्रावण मास

6 अगस्त 2021

भाद्रपद मास

5 सितंबर 2021

आश्विन मास

4 अक्टूबर 2021

कार्तिक मास

3 नवंबर 2021

मार्गशीर्ष मास

2 दिसंबर 2021

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Sankranti Calendar List 2021-22 | संक्रांति लिस्ट 2021-22

Sankranti calendar

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सूर्य के हर महीने राशि परिवर्तन करने की प्रक्रिया को संक्रांति के नाम से जाना जाता है। संक्रांति का समय बहुत पुण्यकारी होता है। संक्रांति के दिन पितृ तर्पण, दान, धर्म और स्नान आदि का काफ़ी महत्व है। अतः सूर्य का एक-एक करके 12 राशियों में प्रवेश करने से वर्ष भर में 12 संक्रांतियाँ होती हैं l 

 संक्रांति का सम्बन्ध कृषि, प्रकृति और ऋतु परिवर्तन से होता है। सूर्यदेव प्रकृति के कारक हैं इसलिए संक्रांति के दिन इनकी पूजा की जाती है। शास्त्रों में सूर्य को आत्मा की संज्ञा दी गई है l सूर्य ग्रह की स्थिति के अनुसार ही ऋतु और जलवायु में परिवर्तन होता है l अतः धरती पर सभी जीवों का भरण पोषण सूर्य के कारण ही संपन्न होता है l 

संक्रांति, ग्रहण, पूर्णिमा और अमावस्या जैसी तिथियों के दिन गंगा स्नान का बहुत अधिक महत्व है l शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति इन पावन तिथियों में गंगा स्नान करता है उसे ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है l 

संक्रांति की सूची संवत 2078 सन 2021-22

मास (महीना)

संक्रांति का नाम  तारीख

चैत्र मास

मीन संक्रांति

14 मार्च 2021

वैशाख मास

मेष संक्रांति

13 अप्रैल 2021

ज्येष्ठ मास

वृष संक्रांति

14 मई 2021

आषाढ़ मास

मिथुन संक्रांति

15 जून 2021

श्रावण मास

कर्क संक्रांति

16 जुलाई 2021

भाद्रपद मास

सिंह संक्रांति

16 अगस्त 2021

आश्विन मास

कन्या संक्रांति

16 सितंबर 2021

कार्तिक मास

तुला संक्रांति

17 अक्टूबर 2021

मार्गशीर्ष मास

वृश्चिक संक्रांति

16 नवंबर 2021

पौष मास

धनु संक्रांति

15 दिसंबर 2021

माघ मास

मकर संक्रांति

14 जनवरी 2022

फाल्गुन मास

कुम्भ संक्रांति

12 फरवरी 2022

चैत्र मासमीन संक्रांति

14 मार्च 2022

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