मकान, दुकान आदि की नींव रखने के मुहूर्त | Bhumi Pujan ke shubh muhurat

bhumi pujan shubh muhurat

bhumi pujan shubh muhurat

सन – 2020

 

प्रारंभकालतारीख

मुहूर्तकासमयघं. मि.

 17 अप्रैल

 07:08 तक

 18 अप्रैल

पूरादिन

 4 मई

 06:13 से 08:56 तक

 9 जुलाई

 10:11 केबाद

 13 जुलाई

 11:14 तक

 25 जुलाई

 11:18 केबाद

 29 जुलाई

 08:33 15:05 तक

 30 जुलाई

 07:40 तक

 12 नवंबर

पूरादिन

 16 नवंबर

 07:06  से 14:36 तक

 25 नवंबर

 15:56 तक

 30 नवंबर

पूरादिन

 9 दिसंबर

 15:18 केबाद

 10 दिसंबर

 12:51 केबाद

 11 दिसंबर

 08:48 तक

 11 दिसंबर

 08:48 से 15:50 तक

 

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नये गृह में प्रवेश करने का मुहूर्त | Best Griha Pravesh Shubh Muhurat 2020 – 21

nav griha pravesh dates

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सन – 2020

प्रारंभकालतारीख

मुहूर्तकासमयघं.मि.

 20 अप्रैल

 07:22 केबाद

 4 मई

 06:13 से 19:19 तक

 8 मई

 08:38 से 12:55 तक

 9 मई

 06:23 तक

 18 मई

 16:57 तक

 18 मई

 16:57 केबाद

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केतु के रत्न लहसुनिया धारण विधि, मुहूर्त | Cats Eye Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

lehsuniya ratan dharan karne ka mantra vidhi

lehsuniya ratan dharan karne ka mantra vidhi

आप शुद्ध तथा असली लहसुनिया अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी लहसुनिया जैसा ही देंगे। जैसे वैदूर्य, कैट्स आई, गोदंती, संगी, अलेक्जेंड्राइट चांदी की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें। 

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर काले  – सफेद अथवा चितकबरे रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर लहसुनिया तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ स्त्राम् स्त्रीम् स्त्रौम् सः केतवे नमः। 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें। 

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ स्त्राम् स्त्रीम् स्त्रौम् सः केतवे नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की अनामिका (छोटी अंगुली के पास वाली अंगुली) में धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

 

केतु ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन– 2020

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 23 अप्रैल

सूर्योदयसे

 23 अप्रैल

 16:04

 25 जून

 12:26

 26 जून

सूर्योदयतक

 23 जुलाई

सूर्योदयसे

 23 जुलाई

 17:44

 24 सितंबर

सूर्योदयसे

 24 सितंबर

 18:09

 26 नवंबर

 21:20

 27 नवंबर

सूर्योदयतक

 24 दिसंबर

सूर्योदयसे

 25 दिसंबर

सूर्योदयतक

 

 सन– 2021

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 21 जनवरी

सूर्योदयसे

 21 जनवरी

 15:36

 25 मार्च

 22:48

 26 मार्च

सूर्योदयतक

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राहू के रत्न गोमेद आदि धारण विधि, मुहूर्त | Gomed Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

gomed ratan dharan karne ka mantra vidhi

gomed ratan dharan karne ka mantra vidhi

आप शुद्ध तथा असली गोमेद अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी गोमेद जैसा ही देंगे। जैसे तुरसा, साफा आदि अष्टधातु अथवा चांदी की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें। 

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर नीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर गोमेद तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ भ्राम् भ्रीम् भ्रौम् सः राहवे नमः। 

 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें। 

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ भ्राम् भ्रीम् भ्रौम् सः राहवे नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की मध्यमा (सबसे बड़ी अंगुली में) धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

राहू ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन – 2020 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 9 अप्रैल

 03:02

 9 अप्रैल

  सूर्योदयतक

 6 मई

 13:51

 7 मई

  सूर्योदयतक

 3 जून

 20:43

 4 जून

  सूर्योदयतक

 5 अगस्त

 09:30

 6 अगस्त

  सूर्योदयतक

 2 सितंबर

सूर्योदयसे

 2 सितंबर

 18:33

 5 नवंबर

 04:50

 5 नवंबर

  सूर्योदयतक

 2 दिसंबर

 10:37

 3 दिसंबर

  सूर्योदयतक

 30 दिसंबर

सूर्योदयसे

 30 दिसंबर

 18:55 

 

 

सन – 2021 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 3 फरवरी

 21:07

 4 फरवरी

  सूर्योदयतक

 3 मार्च

सूर्योदयसे

 4 मार्च

 01:35

 31 मार्च

सूर्योदयसे

 31 मार्च

 09:45

 8 अप्रैल

 03:32

 8 अप्रैल

  सूर्योदयतक

 

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शनि के रत्न नीलम आदि धारण विधि, मुहूर्त | Neelam Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

neelam dhran karne ka mantra vidhi

neelam dhran karne ka mantra vidhi

आप शुद्ध तथा असली नीलम अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी नीलम जैसा ही देंगे। जैसे नीलिमा, जमुनिया, नीला कटहला, एमेथिस्ट, ब्लैकस्टार, ब्लू टोपाज आदि पंचधातु अथवा सोने, चांदी की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें। 

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर काले रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर नीलम तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ प्राम् प्रीम् प्रौम् सः शनैश्चराय नमः। 

 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें। 

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ प्राम् प्रीम् प्रौम् सः शनैश्चराय नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की मध्यमा (सबसे बड़ी अंगुली में) धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

शनि ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन – 2020

 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 11 अप्रैल

सूर्योदयसे

 11 अप्रैल

 20:11

 9 मई

सूर्योदयसे

 9 मई

 06:33

 13 जून

 21:27

 14 जून

सूर्योदयतक

 11 जुलाई

 05:33

 12 जुलाई

सूर्योदयतक

 8 अगस्त

सूर्योदयसे

 8 अगस्त

 16:11

 11 अक्टूबर

 01:17

 11 अक्टूबर

सूर्योदयतक

 7 नवंबर

 08:05

 8 नवंबर

सूर्योदयतक

 5 दिसंबर

सूर्योदयसे

 5 दिसंबर

 14:27

 13 दिसंबर

 04:04

 13 दिसंबर

सूर्योदयतक

 

 

सन – 2021

 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 9 जनवरी

 12:32

 10 जनवरी

सूर्योदयतक

 6 फरवरी

सूर्योदयसे

 6 फरवरी

 17:17

 14 मार्च

 00:21

 14 मार्च

सूर्योदयतक

 10 अप्रैल

 06:46

 11 अप्रैल

सूर्योदयतक

 

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Hawan Kaise Kare -Vidhi | संकट नाशक सामग्री से कामण-टूमण नाशक हवन

हर अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति और प्रसन्नता के लिए यह उपाय – Bhagwat Gita 7th Adhyay : PART 2

प्रत्येक अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति, प्रसन्नता के लिए – Bhagwat Gita 7th Adhyay Mahatmya : PART 1

रत्न या उपरत्न कितने रत्ती अथवा कैरेट का धारण करें | Carat / Ratti For Gemstone

क्या आपको भी बिजनेस शुरू करने में आ रही है दिक्कत ? Business Careers

क्या बिजनेस में आपके भी हैं करोड़पति बनने के योग- Business Yog In Kundli Hindi

जन्म कुंडली से जानें सरकारी नौकरी के योग Govt Job Prediction

स्वप्न देखने के शुभ – अशुभ फल विचार | Nightmare Meaning in Hindi

क्या शत्रु ने किया है – मारण, वशीकरण, उच्चाटन प्रयोग ? दुर्गा सप्तशती से करें निवारण (संस्कृत)

Maa Durga Mantra| Shtru Vinashak Mantra| दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला

त्रिपिंडी और पंचपिंडी श्राद्ध क्या होता है ? | Pitra Dosha Puja Vidhi

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जानिए कौन सी ग्रह चाल बढ़ाती है आपकी Decision Power ?

शुक्र के रत्न हीरा जरकन धारण विधि, मुहूर्त | Zircon Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

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आप शुद्ध तथा असली हीरा अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी हीरे जैसा ही देंगे। जैसे करगी, सिम्मा, जरकन, ओपल, कुरंगी, दूधिया आदि सोने, चांदी अथवा प्लैटिनम की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें। 

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर हीरे तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ द्राम् द्रीम् द्रौम् सः शुक्राय नमः।

 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें। 

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ द्राम् द्रीम् द्रौम् सः शुक्राय नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की अनामिका (छोटी अंगुली के पास वाली अंगुली) अथवा कनिष्ठिका (छोटी अंगुली) में धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

 

शुक्र ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन – 2020

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 24 अप्रैल

सूर्योदयसे

 24 अप्रैल

 18:39

 26 जून

 11:25

 27 जून

सूर्योदयतक

 24 जुलाई

सूर्योदयसे

 24 जुलाई

 16:02

 28 अगस्त

 12:37

 29 अगस्त

सूर्योदयतक

 25 सितंबर

सूर्योदयसे

 25 सितंबर

 18:31

 20 नवंबर

सूर्योदयसे

 20 नवंबर

 09:22

 28 नवंबर

 00:22

 28 नवंबर

सूर्योदयतक

 25 दिसंबर

 07:36

 26 दिसंबर

सूर्योदयतक

 

 

सन – 2021

 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 22 जनवरी

सूर्योदयसे

 22 जनवरी

 18:40

 26 मार्च

 21:39

 27 मार्च

सूर्योदयतक

 

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Hawan Kaise Kare -Vidhi | संकट नाशक सामग्री से कामण-टूमण नाशक हवन

हर अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति और प्रसन्नता के लिए यह उपाय – Bhagwat Gita 7th Adhyay : PART 2

प्रत्येक अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति, प्रसन्नता के लिए – Bhagwat Gita 7th Adhyay Mahatmya : PART 1

रत्न या उपरत्न कितने रत्ती अथवा कैरेट का धारण करें | Carat / Ratti For Gemstone

क्या आपको भी बिजनेस शुरू करने में आ रही है दिक्कत ? Business Careers

क्या बिजनेस में आपके भी हैं करोड़पति बनने के योग- Business Yog In Kundli Hindi

जन्म कुंडली से जानें सरकारी नौकरी के योग Govt Job Prediction

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गुरु के रत्न पुखराज आदि धारण विधि, मुहूर्त Pukhraj Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

pukhraj dharne karne ki vidhi muhurat

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आप शुद्ध तथा असली पुखराज अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी पुखराज जैसा ही देंगे। जैसे – सुनहैला, पीला हकीक, केसरी, घियाकेरु आदि सोने की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें। 

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर पुखराज तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ ग्राम् ग्रीम् ग्रौम् सः गुरवे नमः। 

 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें। 

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ ग्राम् ग्रीम् ग्रौम् सः गुरवे नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की तर्जनी (अंगूठे के पास वाली अंगुली) में धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

गुरु ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन – 2020

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

10 अप्रैल 

सूर्योदयसे

10 अप्रैल

सूर्योदयतक

 4 जून

00:14

 4 जून

18:36

 10 जुलाई

03:09

 10 जुलाई

सूर्योदयतक

 6 अगस्त

11:38

 7 अगस्त

सूर्योदयतक

 3 सितंबर

सूर्योदयसे

 3 सितंबर

20:50

 3 दिसंबर

12:21

 4 दिसंबर

सूर्योदयतक

 31 दिसंबर

सूर्योदयसे

 31 दिसंबर

19:48

 

सन – 2021

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 4 फरवरी

 19:45

 5 फरवरी

सूर्योदयतक

 4 मार्च

सूर्योदयसे

 4 मार्च

 23:57

 1 अप्रैल

सूर्योदयसे

 1 अप्रैल

 07:21

 9 अप्रैल

 04:57

 9 अप्रैल

सूर्योदयतक

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प्रत्येक अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति, प्रसन्नता के लिए – Bhagwat Gita 7th Adhyay Mahatmya : PART 1

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बुद्ध के रत्न पन्ना आदि धारण विधि, मुहूर्त | Emerald Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

panna ratan dharan vidhi mantra

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आप शुद्ध तथा असली पन्ना अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी पन्ने जैसा ही देंगे। जैसेजैसे संग पन्ना, मरगज, ओनेक्स, हरा तुरमली आदि सोने की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें। 

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर हरे रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर पन्ने तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ ब्राम् ब्रीम् ब्रौम् सः बुधाय नमः। 

 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें। 

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ ब्राम् ब्रीम् ब्रौम् सः बुधाय नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की कनिष्ठिका (छोटी अंगुली) में धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

बुद्ध ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन – 2020

 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 30 अप्रैल

सूर्योदय से

 30 अप्रैल

13:17

 24 जून

 13:10

 25 जून

सूर्योदय तक

 22 जुलाई

सूर्योदय से

 22 जुलाई

19:15

 26 अगस्त

 13:04

 27 अगस्त

सूर्योदय तक

 23 सितंबर

सूर्योदय से

 23 सितंबर

18:25

 25 नवंबर

 18:20

 26 नवंबर

सूर्योदय तक

 23 दिसंबर

सूर्योदय से

 24 दिसंबर

04:32

 

सन – 2021

 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 20 जनवरी

सूर्योदय से

 20 जनवरी

12:36

 24 मार्च

 23:12

 25 मार्च

सूर्योदय तक

 

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प्रत्येक अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति, प्रसन्नता के लिए – Bhagwat Gita 7th Adhyay Mahatmya : PART 1

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मंगल के रत्न मूंगा आदि धारण विधि, मुहूर्त | Coral Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

moonga ratan dharan vidhi mantra

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आप शुद्ध तथा असली मूंगा अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी मूंगे जैसा ही देंगे जैसे लाल हकीक, तामड़ा, संगसितारा आदि तांबे की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें। 

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर मूंगे तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ क्राम् क्रीम् क्रौम् सः भौमाय नमः। 

 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें।

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ क्राम् क्रीम् क्रौम् सः भौमाय नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की अनामिका (छोटी अंगुली के पास वाली) अंगुली में धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

मंगल ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन – 2020

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 5 मई

 16:39

 6 मई

सूर्योदयतक

 2 जून

सूर्योदयसे

 2 जून

 22: 54

 30 जून

सूर्योदयसे

 30 जून

 05:38

 7 जुलाई

 23:55

 8 जुलाई

सूर्योदयतक

 4 अगस्त

 08:11

 5 अगस्त

सूर्योदयतक

 1 सितंबर

सूर्योदयसे

 1 सितंबर

 16:37

 3 नवंबर

 02:29

 4 नवंबर

सूर्योदयतक

 1 दिसंबर

 08:30

 2 दिसंबर

सूर्योदयतक

 29 दिसंबर

सूर्योदयसे

 29 दिसंबर

 17:32

 

सन – 2021

 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 2 फरवरी

 22:32

 3 फरवरी

सूर्योदयतक

 2 मार्च

सूर्योदयसे

 3 मार्च

 03:29

 30 मार्च

सूर्योदयसे

 30 मार्च

 12:21

 7 अप्रैल

 02:34

 7 अप्रैल

सूर्योदयतक

 

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Ashadh Devshayani Ekadashi Vrat Katha | आषाढ़ शुक्ला देवशयनी एकादशी व्रत

21 June Surya Grahan | Solar Eclipse | Covid-19 का विश्व पर क्या होगा प्रभाव ?

Ashadh Yogini Ekadashi Vrat Katha | आषाढ़ कृष्णा योगिनी एकादशी व्रत कथा |

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Vaishakh Mohini Ekadashi Vrat Katha | वैशाख शुक्ला मोहिनी एकादशी व्रत कथा

हर अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति और प्रसन्नता के लिए यह उपाय – Bhagwat Gita 7th Adhyay : PART 2

प्रत्येक अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति, प्रसन्नता के लिए – Bhagwat Gita 7th Adhyay Mahatmya : PART 1

Chaitra Kamada Ekadashi Vrat Katha Hindi| चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी व्रत कथा

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चंद्रमा के रत्न मोती आदि धारण विधि, मुहूर्त | Pearl Ratan Dharan Vidhi, Muhurat

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आप शुद्ध तथा असली साउथ सी का सुच्चा मोती अथवा इसके उपरत्न जो कि सस्ते भी होंगे और शुभ असर भी मोती जैसा ही देंगे। जैसे – निमरू, मूनस्टोन, चंद्रमणि, सफेद पुखराज आदि चांदी की अंगूठी में बनवाकर नीचे बताए गए शुभ मुहूर्त में धारण करें।

प्राण प्रतिष्ठा तथा रत्न धारण की विधि

मुहूर्त वाले दिन पूजा पाठ वाले स्थान पर सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर अपनी रत्न जड़ित अंगूठी रख दीजिए। जोतधूप जलाकर एक कटोरी में कच्ची लस्सी (दूध में पानी मिलाकर) और दूसरी कटोरी में थोड़ा गंगाजल रखिए। इसके बाद अपने आसन पर बैठकर मोती तथा इसके उपरत्नों में विशेष शक्ति उत्पन्न करने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

ॐ श्राम् श्रीम् श्रौम् सः चंद्रमसे नमः। 

 

 

मंत्र जाप पूरा होने के बाद नीचे लिखा हुआ प्राण प्रतिष्ठा मंत्र 3 बार बोलें।

आं ह्रीं कों यं रं लं वं शं सं षं हं सः

देवस्य प्राणाः इह प्राणाः पुनरूच्चार्य देवस्य सर्वेन्द्रियाणी इह।

पुनरूच्चार्य देवस्य त्वक्पाणि पाद पायु पस्थादीनि इहः।।

पुनरूच्चार्य देवस्य वाङमनश्चक्षुः क्षोत्रा घृणानि इहागत्य सुखेन चिरंतिष्ठतु स्वाहा।।

 

 

इसके बाद रतन को उठाकर सबसे पहले दूध मिले जल में धो लें। उसके बाद गंगाजल में धोकर तथा धूपदीप के ऊपर से सात बार सीधी तरफ (क्लॉक वाइज) घुमाकर ॐ श्राम् श्रीम् श्रौम् सः चंद्रमसे नमः। मंत्र बोलते हुए जिस हाथ से आप काम करते हैं यानी आपका (एक्टिव हैंड) उस हाथ की कनिष्ठिका (छोटी अंगुली) में धारण करें। 

नोट अपने आसन से उठने से पहले धरती पर हाथ लगाकर उसे माथे से लगाकर प्रणाम करें।

 

चंद्रमा ग्रह के रत्न धारण करने के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

सन – 2020

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 4 मई

 19:19

 5 मई

सूर्योदयतक

 1 जून

सूर्योदयसे 

 2 जून

 01:03 तक

 29 जून

सूर्योदयसे

 29 जून

 07:14 तक

 6 जुलाई

 23:11 से

 7 जुलाई 

सूर्योदयतक

 31 अगस्त

सूर्योदयसे 

 31 अगस्त

 15:04 तक

 2 नवंबर

 23:49 से

 3 नवंबर

सूर्योदयतक

 30 नवंबर

सूर्योदयसे 

 1 दिसंबर

सूर्योदयतक

 28 दिसंबर

सूर्योदयसे 

 28 दिसंबर

 15:39 तक

 

सन – 2021

 

प्रारंभकालतारीख

प्रारंभकालघं.मि.

तारीखसमाप्तिकाल

समाप्तिकालघं.मि.

 1 मार्च

 07:36 से

 2 मार्च

 05:31 तक

 29 मार्च

सूर्योदयसे 

 29 मार्च

 15:02 तक

 6 अप्रैल

 02:04 

 6 अप्रैल

सूर्योदयतक

 

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Hawan Kaise Kare -Vidhi | संकट नाशक सामग्री से कामण-टूमण नाशक हवन

हर अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति और प्रसन्नता के लिए यह उपाय – Bhagwat Gita 7th Adhyay : PART 2

प्रत्येक अमावस्या पर करें पितरों की सद्गति, प्रसन्नता के लिए – Bhagwat Gita 7th Adhyay Mahatmya : PART 1

रत्न या उपरत्न कितने रत्ती अथवा कैरेट का धारण करें | Carat / Ratti For Gemstone

क्या आपको भी बिजनेस शुरू करने में आ रही है दिक्कत ? Business Careers

क्या बिजनेस में आपके भी हैं करोड़पति बनने के योग- Business Yog In Kundli Hindi

जन्म कुंडली से जानें सरकारी नौकरी के योग Govt Job Prediction

स्वप्न देखने के शुभ – अशुभ फल विचार | Nightmare Meaning in Hindi

क्या शत्रु ने किया है – मारण, वशीकरण, उच्चाटन प्रयोग ? दुर्गा सप्तशती से करें निवारण (संस्कृत)

Maa Durga Mantra| Shtru Vinashak Mantra| दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला

त्रिपिंडी और पंचपिंडी श्राद्ध क्या होता है ? | Pitra Dosha Puja Vidhi

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