Tripushkar Yog | त्रिपुष्कर योग (सन् 2021-22)

shubh muhurat teen guna labh dene wala yog

‘त्रिपुष्कर योग’ जैसे कि नाम से ही पता चलता है कि तिगुना। ‘जी हां’  त्रिपुष्कर योग में यदि किसी व्यक्ति को लाभ होता है तो है तिगुना होता है और यदि किसी कारणवश हानि हो जाती है तो वह भी 3 गुना ही होती है। अतः जितने भी हमारे शास्त्रों में अच्छे मुहूर्त और योग बताए गए हैं उनको दोगुना करने वाला योग त्रिपुष्कर योग कहलाता है। इस युग में शुभ काम करने पर यह तिगुना लाभ प्रदान करता है।                                         

त्रिपुष्कर योग सन 2021 – 2022

 

प्रारंभ काल – तारीखप्रारंभ काल – घं.मि.तारीख – समाप्ति कालसमाप्ति काल – घं.मि.
19 अप्रैलप्रातः 05:0219 अप्रैलसूर्योदय तक
24 अप्रैलप्रातः 06:2324 अप्रैलशाम 7:17
28 अप्रैलप्रातः 05:1628 अप्रैलसूर्योदय तक
02 मईदोपहर 2:5103 मईसूर्योदय तक
12 जूनशाम 4:5812 जूनरात्रि 8:18
22 जूनसूर्योदय से22 जूनप्रातः 10:22
26 जूनसूर्योदय से26 जूनशाम 6:11
06 जुलाईसूर्योदय से06  जुलाईदोपहर 3:20
15 अगस्तप्रातः 05:5415 अगस्तप्रातः 09:51
24 अगस्तसूर्योदय से24 अगस्तशाम 4:05
29 अगस्तप्रातः 03:3529 अगस्तरात्रि 11:25
08 सितंबरप्रातः 04:3808 सितंबरसूर्योदय तक
17 अक्टूबरप्रातः 09:5317 अक्टूबरशाम 5:39
02 नवंबरसूर्योदय से02 नवंबरप्रातः 11:31
21 दिसंबरसूर्योदय से21 दिसंबरदोपहर 2:54
26 दिसंबरप्रातः 05:0626 दिसंबररात्रि 8:08
2022
प्रारंभ काल – तारीखप्रारंभ काल – घं.मि.तारीख – समाप्ति कालसमाप्ति काल – घं.मि.
04 जनवरीसूर्योदय से04 जनवरीप्रातः 10:56
13 फरवरीप्रातः 09:2813 फरवरीशाम 6:42
22 फरवरीशाम 6:3623 फरवरीसूर्योदय तक
27 फरवरीप्रातः 08:4928 फरवरीप्रातः 05:43
09 मार्चरात्रि 00:3209 मार्चसूर्योदय तक

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2 Comments

  1. सर इस मुहुर्त मेज्ञकिया सुख जप ध्यान का फलफी ऊतना गुणा बघता है क्या?

    • ओम नमः शिवाय
      श्रीमान जी
      द्विपुष्कर योग और त्रिपुष्कर योग जिसमें 2 गुना और 3 गुना अधिक लाभ होने के योग बनते हैं। यह एक प्रकार के मुहूर्त हैं। इनका पूजा-पाठ, जप – तप, होम – हवन आदि से कोई अर्थ नहीं है। बताए गए द्विपुष्कर योग और त्रिपुष्कर योग में बहुमूल्य वस्तुएं जैसे – आभूषण, भूमि, गाड़ी आदि का क्रय करना शुभ फलदायक माना गया है।

      मंत्र जप में कई गुना अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए जो संपादक दोष और उत्पीड़न दोष के मुहूर्त बताए गए हैं। वह मुहूर्त पूजा – पाठ, मंत्र जाप अथवा पुण्यदाई कर्म करने के लिए शुभ हैं। क्योंकि वह मुहूर्त सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण जैसा फल देने का सामर्थ्य रखते हैं।


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